Fact check

She says until we are not that ideal society where our religious identities, our religious beliefs are, our slogans are not well accepted until then we should do inclusive protest. And this protest we are also doing and taking the society towards that step we can join other people.

Ayupp Fact Check image source social media

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Fake news claims: Vivek Ranjan Agnihotri posted a controversial video from thewre journalist claiming her words as Islamic Caliphate Chief strategist @khanumarfa explains how to fool people with words like ‘inclusive’ in order to establish an ideal Islamic society in India.

Just write #SHAME in reply if you condemn her strategy.

 

Leading Islamist in India

caught on video advocating for a "change in strategy" by Muslims to push for Islamisation of Hindustan without compromising their Islamic ideology. She seems to advocate faking love of secularism, constitution & flag

Facts Check Verdict: True

News Verification: the video has been watched over 3 lakh times on Social media and people have sharply reacted to the ugly video. Arfa Khanum Sherwani is an Award-Winning Journalist. Senior Editor @thewire_in.

The video was uploaded on YouTube by theWire on Jan 24, 2020

Watch the below video starting from 17:15 Seconds to hear the great wisdom words from theWire journalist. She says until we are not that ideal society where our religious identities, our religious beliefs are, our slogans are not well accepted until then we should do inclusive protest. And this protest we are also doing and taking the society towards that step we can join other people.

She says in Hindi, "क्योंकि यह हमारे धर्म पर हमला है और हमारे धर्म पर हमला किया जाता है, इसलिए हम मुसलमानों के रूप में विरोध करना चाहते हैं|

आपको इन विरोधों को उतना ही समावेशी बनाना होगा, जितना आप कर सकते हैं और इसके आधार को मजबूत बना सकते हैं। आप अपना कलमा पढ़ते हैं, इबादत करिए, और भारतीय संविधान तब भी आपको अधिकार देता है। लेकिन जब आप जनता के बीच आते हैं… आप एक मुसलमान हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है… और आप पर हमला किया जा रहा है, जो सच भी है। लेकिन यह समझें कि ये विरोध भारत की धर्मनिरपेक्षता, भारतीय संविधान और इसकी मूल संरचना को बचाने के लिए है। हमें इसे समावेशी बनाना होगा। इसका केवल मुस्लिम बनकर विरोध नहीं करना है। मैं उन सभी से माफी माँगती हूँ, जिनकी भावनाएँ आहत हुई हैं… लेकिन मैं चाहती हूँ कि इस बात पर आम सहमति बने कि जब तक एक आदर्श समाज का निर्माण नहीं हो जाता है, और जब तक हमारी धार्मिक पहचान, धार्मिक विश्वास और नारे स्वीकार नहीं किए जाते हैं, हमें एक समावेशी विरोध करना चाहिए

लेकिन अगर केवल मुसलमान ही विरोध करते रहे… अगर केवल 20 करोड़ लोग विरोध करते हैं, तो क्या शेष 100 करोड़ लोग… यदि आप मजहबी नारे लगा रहे हैं, तो क्या वे आपका हिस्सा बनने के लिए तैयार होंगे? मैं एक आदर्श दुनिया की बात कह रही हूँ, एक आदर्श भारतीय समाज में, हर किसी को अनुमति दी जानी चाहिए, उनका स्वागत किया जाना चाहिए और वे जो भी कहना चाहते हैं, उन्हें कहने दिया जाना चाहिए। वे कुछ भी कहकर विरोध कर सकते थे, ‘जय श्री राम’, ‘वंदे मातरम’, ‘भारत माता की जय’ या खालसा या ईसाई नारों के नाम पर विरोध कर सकते हैं, लेकिन हम एक आदर्श समाज नहीं हैं"

No doubt she is indirectly telling try to be inclusive now and later we will make people do what we want.

 



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